Saturday, 15 July 2017

छाते

ऐसा नहीं है 
बरसात में है याद आते 
उनसे रिश्तों को क्या छुपाना 
उनसे है सालो से नाते 

बरसात में तो 
सभी है साथ उनका चाहते 
गर्मियों में भी 
कई लोगों को है ये बहाते 

सदाबहार है उनसे रिश्ता 
बड़ों को काला रंग 
बच्चों को है ये 
रंग -बिरंगे अच्छे लगते 

साल के दो महीने में 
जम कर है ये नहाते 
सुबह से शाम भीग कर भी 
अगले दिन के लिए है सुख जाते 

कई होते है बड़े मुल्यवान 
जो बड़े,विशेष लोगों को है बनते 
पर कीमत इतनी भी होती है 
की हर आदमी है खरीद पाते