Thursday, 15 December 2016

पीने की आदत

तू जो हर रोज़ पीता है
वजह यही है
जो आज तेरा घर रीता है
 
छोड़ दिया तुझे
एक-एक  करके सबने
आज न साथ तेरे पत्नी -बच्चे
न तेरे माता पिता है

कल तक जो साथ थे
दोस्त -यार तेरे
टूट चूका उनसे
आज नाता है
ऐसी क्या खता हो गई तुमसे
क्या कभी सोचा है

है तू आज ज़िन्दगी के
उस मोड़ पर
जहाँ  न किसी से तेरा रिश्ता
न किसी से कोई नाता है

सुधार दे तू अपनी ये खता
अभी भी नहीं कुछ बीता है
ये भी कोई ज़िन्दगी है
जो पिने के लिए जीता है

अमल करोगे तो ये गीता है
वरना आज के वक़्त में कौन
किस को बोल सकता है
ये तो बस एक कविता है

छोड़ दे तू ये आदत
जो हर रोज़ पीता है
छोड़ दे तू ये आदत
जो हर रोज़ पीता है