Saturday, 31 August 2019

स्वार्थी मनुष्य

देख माँ धरती
कैसी तेरी सन्तान
की हालत हो गई
हर वस्तु है उसकी
फिर भी देखो
कैसे है वह समेटने लगी

तूने तो माँ उन्हें
जीना सिखाया था
देख वह क्या से क्या
है सिख गई
बाँट दिया उन्होंने तुझे
बीच में सरहदे बना दी गई

अपने भाई से भाई कहता है
ये तेरी नहीं मेरी माँ है
क्या वह भूल गया है
मानव के अलावा तेरी
और भी संताने यहाँ हैं
अगर वह ऐसे अधिकार करेंगे
तो बाकी को जाना कहाँ हैं

दो पल की ज़िन्दगी है
माँ तेरी सन्तान की
सोचता है मानव सबसे बुद्विमान हूँ
पर देख उसने कैसी
तेरी दुर्दशा है की
एक बात जान ले ! हे मानव
अगर ऐसा ही तेरा रवईया रहा
तो मिटा देगा एक दिन तू
हस्ती अपनी माँ की भी