पिंजरे के पंछी सी
कैद हो गई है ज़िन्दगी
प्रतीत होता है ऐसा तेरे कर्मो से
इच्छा है तुझे कुछ साथ ले जाने की
इतना जान ले ओ शख्स
साथ न कोई कुछ
ले जा सका आज तक
फिर तूने कैसे हिम्मत की
हर तरफ दिखता है मंज़र
कैद हो गई है ज़िन्दगी
जियेगा क्या तू आज में
तुझे तो चिंता है कल की
तुझे तो चिंता है कल की
कैसे जियेगा इन्सान यहाँ
क्या हालत हो गई दुनियां की
जी तो नहीं पाया तू दो पल को
बातें करता है भविष्य की
निकलता है तू हर सुबह
निकलता है तू हर सुबह
घर से ऑफिस से घर
देख तेरी हालत कैसी हो गई
छोड़ दे ये झूठा मुस्कुराना
इतना तो पता है हमें भी
कीमत है यहाँ हर खुशी की
देख तेरी हालत कैसी हो गई
छोड़ दे ये झूठा मुस्कुराना
इतना तो पता है हमें भी
कीमत है यहाँ हर खुशी की
प्रतीत होता है ऐसा तेरे कर्मो से
इच्छा है तुझे कुछ साथ ले जाने की
इतना जान ले ओ शख्स
साथ न कोई कुछ
ले जा सका आज तक
फिर तूने कैसे हिम्मत की
हर तरफ दिखता है मंज़र
नये दौर का
फिर भी तनाव भरी है ज़िन्दगी
न जाने कब हो
इस दुनियां से जाना
खुशी से जी ले मिलते है जितने पल भी
खुशी से जी ले मिलते है जितने पल भी