हवा में धुँआ वह उड़ाता था
अपने मस्लस देख कर
अपने मस्लस देख कर
कश वह लगाता था
कश अन्दर
वह अपने मसल्स देखता था
कश बाहर
वह आसमान को देखता था
नौसिखिया था शायद वह
अभी-अभी पीना सीखा था
थोड़ा काश अन्दर
फिर हवा में उड़ा देता था
फटा-फट कश खिंचता था
आँखों को वह मिचता था
ऐश गिराना भी नहीं
आता था उसे
फिर भी धुँआ उड़ाता था
कभी जलाता
कभी बुझाता था
कभी फॉर सक्वेयर
कभी गोल्ड फ्लेक पीता था
वह अपने मसल्स देखता था
कश बाहर
वह आसमान को देखता था
नौसिखिया था शायद वह
अभी-अभी पीना सीखा था
थोड़ा काश अन्दर
फिर हवा में उड़ा देता था
फटा-फट कश खिंचता था
आँखों को वह मिचता था
ऐश गिराना भी नहीं
आता था उसे
फिर भी धुँआ उड़ाता था
कभी जलाता
कभी बुझाता था
कभी फॉर सक्वेयर
कभी गोल्ड फ्लेक पीता था