Sunday, 23 May 2021

खाली सड़क

 सहर का समय है

सड़क पड़ी खाली सुनसान है

इतनी शान्त है वह

जैसे दिन भर की चहल-पहल

से वह अभी अनजान है


कुछ कमी सी लग रही है

कुछ नमी सी लग रही है

न कोई युवा, न बच्चा

न कोई गाड़ी, न रिक्शा

सड़क तन्हा लग रही है


बिना वाहनों के सड़क

एकदम खाली है

तन्हा जैसे कोई छोरी है

मंज़र खाली सड़कों का

जैसे लुटी हुई तिजोरी है


गाड़ियों से सजी-सवरी

सड़कें हँसकर बोलती है

गाड़ियाँ उसकी दिल-धड़कन है

गाड़ी के बिना उसकी स्थिति

जैसे आभूषण के बिना दुल्हन है