न कोई हारा तुझसे
न किसी को तू हारा पाएगा
न कोई जीता तुझसे
न किसी से तू जीत पाएगा
हार-जीत है तो
ज़िन्दगी के दो पहलु ही
छलकते है ये सामने
कोई इन्हें न छिपा पाएगा
जीवन है दो पल
कैसे ये निर्णय कर पाएगा
तू हारा या तू जीता
कैसे खुद को बता पाएगा
मुक़म्मल नहीं होता
हर कार्य इस जीवन में
कुछ न कुछ तो
अधूरा ही रह जाएगा
सोच तू बस अच्छा
जो करे अच्छा हो जाएगा
सन्तुष्टि हो गई अगर तुझे
फिर ज़िन्दगी में कभी हार न पाएगा