अपनी जैकेट को चादर
बाँहों को तकिया बनाया मैंने
ऐसी कई रातों को
तन्हा गुजारा है मैंने
बाँहों को तकिया बनाया मैंने
ऐसी कई रातों को
तन्हा गुजारा है मैंने
रास्ते थे मेरे हमसफ़र
कोई नहीं था साथ अपने
ठान लिया था बस चलना है
बाकी आगे जो हो रब जाने
नहीं देता कोई आसानी से काम
ढूंढते थे सभी ठुकराने के बहाने
चाहे उन्हें कुछ भी न आए
फिर भी बनते थे सियाने
लड़ना तो था ही ज़िन्दगी से
फिर चाहे बन जाते अफ़साने
पड़ जाते अगर हौंसले कमज़ोर
शायद बदल देते हम भी ठिकाने
देखे थे कई सपने
जो करने थे मुझको पुरे
एक मौके की तलाश थी
फिर तो भरनी थी उड़ाने