Sunday, 5 June 2022

अपना सोच

ये जूनून है तेरा
या है ये मज़बूरी
क्यों करता है तू
हर रोज़ तय इतनी दूरी

देख कर तुझको
लगता है ऐसा मुझको
ज़िन्दगी का कोई मूल्य नहीं
पैसा है तेरे लिए सबसे जरुरी

दो पल का भी वक़्त नहीं
खुद के पास तेरे लिए
कब होंगी तेरी आशाएं पुरी
कब सोचेगा अपने जीवन के लिए

कुछ तो सोच अपना
कुछ तो ले निर्णय तू भी
क्यों चलता है उनके पीछे
कब तक चलेगी ये हज़ूरी

जीवन जीना है तूने
नहीं कहना फिर ये-वो थी मज़बूरी
हर कदम बड़ा अपने दम पर
वरना रह जाएगी राहें अधूरी