ये जूनून है तेरा
या है ये मज़बूरी
क्यों करता है तू
हर रोज़ तय इतनी दूरी
या है ये मज़बूरी
क्यों करता है तू
हर रोज़ तय इतनी दूरी
देख कर तुझको
लगता है ऐसा मुझको
ज़िन्दगी का कोई मूल्य नहीं
पैसा है तेरे लिए सबसे जरुरी
दो पल का भी वक़्त नहीं
खुद के पास तेरे लिए
कब होंगी तेरी आशाएं पुरी
कब सोचेगा अपने जीवन के लिए
कुछ तो सोच अपना
कुछ तो ले निर्णय तू भी
क्यों चलता है उनके पीछे
कब तक चलेगी ये हज़ूरी
जीवन जीना है तूने
नहीं कहना फिर ये-वो थी मज़बूरी
हर कदम बड़ा अपने दम पर
वरना रह जाएगी राहें अधूरी