दिन रात लगा है मानव
अपनी जरूरतों को
पूरा करने के लिए
घूम रहा है वह
शहर-शहर सड़को पर
अपनी जरूरतों को
पूरा करने के लिए
घूम रहा है वह
शहर-शहर सड़को पर
न वह रुक रहा है
न वह थक रहा है
जूनून है उसमें
पैसे इकट्ठा करने का
दिखता है उसके कामों पर
अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ
बहुत पड़ी है उसके घर
फिर भी लगा है वह
देर रात तक जगा है वह
लगता है जैसे उसने जाना है चाँद पर
हो रहे है सफल प्रयास
मिट रही है सबकी प्यास
हर वर्ग का बदल रहा है जीवन स्तर
रंग ला रही है उनकी मेहनत
दिखा रहे हैं वह बदल कर
पचास वाला सौ में
सौ वाला पांच सौ में
कर रहा है साबित बदल कर
हौंसले बुलन्द है उनके
मेहनत के लगाए है जबसे पर