ज्ञान है वह धुंध
जिस में तू समा जाएगा
सोचेगा पकड़ लेगाजिस में तू समा जाएगा
तू कभी न कभी उसको
जब भी तू बढ़ेगा आगे
तो फासला बढ़ता ही जाएगा
ज्ञान के बीच रह कर भी
ज्ञान को समझ न पाएगा
क्या तू अधूरा है
क्या हो गया है पूर्ण
उलझा रहेगा इसी जुस्तजू में
कब पूर्ण ज्ञानी बन जाएगा
चलता रहेगा यूँ ही सिलसिला
चाहे तू दुनियाँ से चला जाएगा
न कोई पूर्ण ज्ञान धारण कर सका
न कोई कभी कर पाएगा
बढ़ता ही जा रहा है अनंत काल से
और भविष्य में भी बढ़ता ही जाएगा