ज़िन्दगी भर...
मंज़िल की तलाश में रहे
न जाने कितने दूर थे
जाने कितने पास में रहे
ज़िद थी शायद कुछ पाने की
तलाश में इसीलिए भटकते रहे
मंज़िल मिली न मिली पता नहीं
दिन-रात बस जगे,लगे रहे
केवल एक ही नहीं
कई रास्तें चलते रहे
मंज़िल सामने हो कर भी
रास्तों के लिए भटकते रहे
पैर ज़मीन पर थे
फिर भी आसमान में उड़ते रहे
कुछ हासिल न हो रहा था
फिर भी हम वक़्त से जुड़ते रहे
पता नहीं वक़्त ही कब निकल गया
हम फिर भी तलाश में लगे रहे
लोगों का सफर खत्म हो गया
और हम मंजिल की आस में लगे रहे
मंज़िल की तलाश में रहे
न जाने कितने दूर थे
जाने कितने पास में रहे
ज़िद थी शायद कुछ पाने की
तलाश में इसीलिए भटकते रहे
मंज़िल मिली न मिली पता नहीं
दिन-रात बस जगे,लगे रहे
केवल एक ही नहीं
कई रास्तें चलते रहे
मंज़िल सामने हो कर भी
रास्तों के लिए भटकते रहे
पैर ज़मीन पर थे
फिर भी आसमान में उड़ते रहे
कुछ हासिल न हो रहा था
फिर भी हम वक़्त से जुड़ते रहे
पता नहीं वक़्त ही कब निकल गया
हम फिर भी तलाश में लगे रहे
लोगों का सफर खत्म हो गया
और हम मंजिल की आस में लगे रहे