Friday, 16 December 2016

तेरे इंतज़ार में

तेरे इंतज़ार में
कब तक बैठें ओ जाना
तू न आई
आ गया तेरे इंतज़ार में मयखाना 
कुछ देर तो 
मैं रुका रहा
तेरे लिए सजाये आशियाने में
न आई तू हो गई बड़ी देर
चला गया फिर मैं मयखाने में

तेरे इंतज़ार में
कब तक बैठते ओ जाना
तू न आई
आ गया तेरे इंतज़ार में मयखाना 

उठा दिया मैंने भी जाम बारी-बारी
दिखने लगी मुझे हर तरफ़ तेरी परछाई
ठान लिया अब मैंने
सह लेंगे हम तेरी जुदाई
तेरे इंतज़ार में
कब तक बैठते ओ जाना
तू न आई
आ गया तेरे इंतज़ार में मयखाना 

है इस महफ़िल में
हर कोई अनजाना
कोई है ज़िंदगी से टुटा
कोई है प्यार में जला परवाना
तेरे इंतज़ार में
कब तक बैठते ओ जाना
तू न आई
आ गया तेरे इंतज़ार में मयखाना 

कुछ देर बाद ख़त्म हुआ नज़राना
ढूँढने लगे सभी अपना-२ ठिकाना
हम भी छोड़ चले मयखाना
हो गए घर के लिए रवाना
जी लेंगे अब हम तेरे बिना
ढूंढ लिया है हमने अपना ठिकाना
तेरी याद से पहले 
अब याद आता है हमको मयखाना
तेरे इंतज़ार में
कब तक बैठे रहते ओ जाना
तू न आई
आ गया तेरे इंतज़ार में मयखाना