Thursday, 24 August 2017

70 साल

देखते ही देखते 
दिन गुज़र गए 
गुज़र गए आजादी के ७० साल 

सोचा करते थे बस 
आज नहीं तो कल 
कभी न कभी बदलेगा देश का हाल 

अब एहसास होने लगा है 
कुछ तो बदलाव होने लगा  है 
पकड़ रहा है देश जब से चाल 

होगा हर एक के साथ इन्साफ 
देना पड़ेगा अब सबको हिसाब -किताब
हो रहे थे जो सालों  से मालामाल 

अब न कोई दबा रहेगा 
अब न कोई डरा रहेगा 
सीधा -सीधा पुछेगा अब सवाल  

अब न कोई मजबूरी का फायदा उठाएगा 
न किसी को रोक पाएगा 
होगी कार्यवाई उस पर तत्काल 

सबको तुरन्त जवाब मिलेगा 
न रहे अब गाँधी के गाल 
नहीं बचेगा कोई अब करके बवाल 



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