Saturday, 29 September 2018

कुड़ेवाला

मुझे अच्छा नहीं लगता है
जो तुम गली,सड़कों,मुहल्लो में
फैलाते हो कुड़ा-कचरा और ये दुर्गन्ध
माना हम हैं कुड़े वाले
पर हम भी इन्सान है
हमें भी आती है दुर्गन्ध

कब तक चलेगा ये शहर
कुड़ेवालो के भरोसे से
समय पर नहीं उठ पाता है
कुड़ा हर जगहओं से
हर शाम को डालते है
लोग कुड़ा सड़को में
फिर चलते है सुबह
मुख डक के वहीं से

क्या कभी हमें भी मिलेगा छुटकारा
कब तक जीएगे युं बिमारीयों के सगं
हमने तो किया है खुद से वादा
युं ही लड़ते रहेगे गन्दगी से जंग
सुधारेंगे न जब तक आप खुद को
युं ही उठाते रहेंगे गन्दगी
न होंगे हम कभी तंग

है यहां लोग सभी पढ़े-लिखे
पर स्वच्छता का स्तर है बहुत निचे
पालिथीन का प्रयोग जब तक
बंद न होगा इस शहर से
उसके बिना कुड़े का निपटारा होगा कैसे
क्या कभी लोग आएगे आगे
कब तक सरकार को देखते रहेंगे ऐसे



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