एक दिन आएगा
जब मानव तरस जाएगा
लाख कोशिश कर के भी
अपना वजुद नहीं बचा पाएगा
जब मानव तरस जाएगा
लाख कोशिश कर के भी
अपना वजुद नहीं बचा पाएगा
जितनी ज़्यादा गति से
बढ़ रहा है तू आधुनिकता की ओर
उतना ही कम समय
मानव इस धरती पर रह पाएगा
पैसों की मानसिकता वाला मानव
क्या पैसे ही खाएगा
एक दिन सब स्त्रोत समाप्त हो जाएगें
बस पैसा ही पैसा रह जाएगा
तू अपना समय निकाल चुका
आने वाला कैसे जी पाएगा
तेरी कामयाबी मूल्यहीन होगी उनको
बस परेशानियों का सबब बन जाएगा
कहेगा वह खुद तो चला गया
अब हमसे क्या उम्मीद करेगा
निरादर होगा तुम्हारा
जब भी कहीं जिक्र आएगा
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