मेरा बिस्तर मुझे बुलाता है
बैठे-बैठे वो नींद लाता है
सुलाने के लिए वो आगे
उठाने को भूल जाता है
बैठे-बैठे वो नींद लाता है
सुलाने के लिए वो आगे
उठाने को भूल जाता है
मुझे लगता है शायद
तन्हाई से वो डरता है
किसी को वो छोड़ता नहीं
क्यूँकि अकेला रह जाता है
कुछ समय को अगर
मैं लेटु दिन में
कर देता है कैद दिमाग वो
चाँद तारें दिखता है दिन में
सब दर्द वो भुलाता है
थकान को भी मिटाता है
चेहरे पे मुस्कान
हर गम को छुपाता है
जब कहीं और जगह
मुझे नींद नहीं आती है
जाग-जाग के सोना पड़ता है
तब बिस्तर की याद आती है
#endlessthoughts
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