तुम क्या जानो
हमने क्या-क्या सहा है
ज़माने ने हमें
क्या-क्या नहीं कहा है
तुम क्या जानो
दुसरो के अधीन रहना
अच्छे को बुरा और
बुरे को अच्छा पड़ता है कहना
गैरों की खुशियाँ के लिए
पड़ता है अपना ख़ून बहाना
वरना ठिकाना तो दूर की बात
मुश्किल से मिलता है दो वक़्त का खाना
होता है पूरा अधिकार उनका हम पर
ग़लत नहीं होगा पशु कहना
हर आदेश सुनना पड़ता है
मुश्किल हो जाता साँस लेना
नहीं ये केवल शारीरिक वेदना
हर प्रकार का दर्द पड़ता है झेलना
उन्हें नहीं कोई कदर किसी की
आसान है उनको हमारे दिल दिमाग़ से खेलना
#endlessthoughts
ReplyDeletePaavaaaaaa! Mast likha hai!!! PEL DO!!!
ReplyDelete