Thursday, 9 September 2021

हार जीत

न कोई हारा तुझसे

न किसी को तू हारा पाएगा

न कोई जीता तुझसे

न किसी से तू जीत पाएगा


हार-जीत है तो

ज़िन्दगी के दो पहलु ही

छलकते है ये सामने

कोई इन्हें न छिपा पाएगा


जीवन है दो पल

कैसे ये निर्णय कर पाएगा

तू हारा या तू जीता

कैसे खुद को बता पाएगा


मुक़म्मल नहीं होता

हर कार्य इस जीवन में

कुछ न कुछ तो

अधूरा ही रह जाएगा


सोच तू बस अच्छा

जो करे अच्छा हो जाएगा

सन्तुष्टि हो गई अगर तुझे

फिर ज़िन्दगी में कभी हार न पाएगा


1 comment: