ज़िन्दगी को ढूंढ़ने
हम कहाँ चले थे
कह गए जिनको बुरा
लोग वही भले थे
हर ख़ुशी नसीब हुई
जब उनके साथ चले थे
कितना गलत किया उनके साथ
सब समझ आ गया
जब लोग हमारी ज़िन्दगी से खेले थे
ज़िन्दगी की सच्चाई
हम ज़रा देर से समझे थे
अपनो को कभी गैर
अज़नबी को अपना समझे थे
हम क्या है और
खुद को क्या समझे थे
हम अपनी धुन में मस्त
किसी की बात कहाँ सुनते
लोग तो बहुत कुछ बोलते थे
अब मान लिया है
ज़िन्दगी वही थी
जो हम जी गए
बाद में तो दिन काटते थे
दो पल जिन्दगी के लिए
पल-पल मरते थे
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