Sunday, 7 May 2023

ज़िन्दगी वही थी

ज़िन्दगी को ढूंढ़ने
हम कहाँ चले थे
कह गए जिनको बुरा
लोग वही भले थे

हर ख़ुशी नसीब हुई
जब उनके साथ चले थे
कितना गलत किया उनके साथ
सब समझ आ गया
जब लोग हमारी ज़िन्दगी से खेले थे

ज़िन्दगी की सच्चाई
हम ज़रा देर से समझे थे
अपनो को कभी गैर
अज़नबी को अपना समझे थे

हम क्या है और
खुद को क्‍या समझे थे
हम अपनी धुन में मस्त
किसी की बात कहाँ सुनते
लोग तो बहुत कुछ बोलते थे

अब मान लिया है
ज़िन्दगी वही थी
जो हम जी गए
बाद में तो दिन काटते थे
दो पल जिन्दगी के लिए
पल-पल मरते थे


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