मेरी इज्ज़त है खेती
यही रोटी मुझको देती
इसी के दम पे हूँ खड़ा
किसी के आगे न झुकने देती
मुश्किल है थोड़ा काम
मेहमत तो है करनी पड़ती
न किसी की रोक -टोक
अपनी मर्ज़ी की है ज़िन्दगी होती
जो चाहिए वही फसल उगा दो
बचे तो बेच दो
कुछ भी व्यर्थ नहीं जाती
हर फसल है बाज़ार में बिकती
हर किसान को करो प्रोत्साहित
तभी चलेगी और बढ़ेगी खेती
नयी पीढ़ी का तो पता नहीं
दो पल के लिए भी नहीं उठते गैंती
उन्हें न बनानी, न है पकानी आती
उन्हें खानी आती है बस रोटी
उनकी पहली पसंद है बर्गर, पीज़ा
फिर क्या करेंगे वह खेती