Thursday, 26 January 2017

विनती

है  ये  विनती 
पढ़ने वालों से 
भविष्य में भारत को 
आगे ले जाने वालों से 
खुद को जानो -पहचानो
यही विनती है आने वालों से 

है  ये  विनती 
मंज़िल मिलने से पहले 
भाग जाने वालों से 
है  ये  विनती
मुसीबत को देख कर 
रास्ता बदलने वालों से 

न हटो तुम 
पीछे हार के 
हार के ही जीत मिलती है 
जा कर पूछ लो जीतने वालों  से 
नहीं बचोगे तुम भाग कर भी 
जा कर पूछ लो भागने वालों से  

विनती है करो तुम डट कर 
मुकाबला हर मुश्किलों से 
क्या होगा - क्या होगा 
निकाल दो ये विचार दिल से 
जीना तो है ही हर हाल में 
फिर क्या घबराना मुश्किलों  से  


Sunday, 22 January 2017

भिखारी की कुटिया

स्टेशन के साथ ही   
उसकी टूटी -फूटी कुटिया थी 
वहाँ पर एक खाट 
कोने में मिट्टी का मटका
एक गिलास एक थाली 
पानी के लिए एक लुटिया थी 

थाली में कभी पाव 
कभी सुखी रोटी होती थी 
पिने के लिए तकिये के साथ 
बिस्लेरी की बोतल रखी थी
सहारे के लिए उसने 
एक सोठी रखी होती थी 

बाँस के पाँच -छः डंडो से 
बनी वह कुटिया थी 
फिल्मी बैनरो से बनी   
उसकी छत और दीवारें थी 
कभी इसमें ठण्ड 
कभी गर्मी होती थी 

दशा उसकी  बड़ी दयनीय 
पहनी उसने धोती फटी थी 
शक्ल उसकी काली -कलुटी  
राख -कोयले के जैसे थी  
ऐसे सलाम करता पुलिसवालों को 
जैसे उनसे उसकी जान पहचान थी 


Wednesday, 18 January 2017

हिमाचल का पर्यठन

देव भूमि है हिमाचल  
हज़ारो देवी -देवताओं का
वास है यहाँ
वन भूमि है हिमाचल 
हज़ारो रंग के पेड़-पौधे
हर नज़ारा खास है यहाँ
शान्त भूमि है हिमाचल
हर तरफ अमन 
शान्ति है यहाँ 
हिम के आँचल में 
हिमाचल में 
ऐसा है हिमाचल में 

कल-कल करते
दिखते है झरने यहाँ 
सदाबहार बर्फ से ढके
रहते है पर्वत यहाँ 
हर तरफ  हर 
सुबह -शाम दीखते है 
अदभुत नज़ारे यहाँ 
एक बार जो आए 
दोबारा आना 
चाहता है वह यहाँ 
हिम के आँचल में 
हिमाचल में 
ऐसा है हिमाचल में 

जगह-जगह पर है
बहती नदियाँ यहाँ 
प्राकृतिक झीलों का भी 
सौन्दर्य है अदभुत यहाँ 
हर धर्म के मंदिर,मस्ज़िद
चर्च और गुरुदवारे है यहाँ 
राजा -महाराजा के 
महल बताते है 
उनकी रियासतों का 
इतिहास यहाँ 
हिम के आँचल में 
हिमाचल में 
ऐसा है हिमाचल में 

कोने कोने में है 
पर्यटन स्थल यहाँ 
सबसे मशहूर 
स्थल है शिमला
मनाली,धर्मशाला
और चम्बा यहाँ 
हिम के आँचल में 
हिमाचल में 
ऐसा है हिमाचल में  

छोटे-बड़े गांव 
और शहरो में
लगते हैं मेले यहाँ 
त्योहारों की भी
लगी होती है 
बहार यहाँ 
होती है हर फसल
की खेती यहाँ 
सबसे ज्यादा सेब की 
पैदावार यहाँ   
हिम के आँचल में 
हिमाचल में 
ऐसा है हिमाचल में  


Sunday, 15 January 2017

सुसाइड नोट

कहती थी मैं  
अपने माँ -बाबा से 
मैं पढ़ना चाहती हूँ 
मैं भी आगे बढ़ना  चाहती हूँ 
पर उन्हें कहाँ मेरी परवाह थी 
उन्हें अपनी इज़्जत की पड़ी थी 

मेरी शादी करवाना चाहते थे वो 
इसलिए मैं कई दिनों से
बंद कमरे में पड़ी थी 
सोचते थे मैं किसी 
और के साथ भाग जाऊँगी  

पर कौन विशवास करेगा मेरा  
किसे मैं अपना दर्द बताऊँगी 
जा रही हूँ मैं जिन्दगी से 
मौत की तरफ आज 
अब न दिखूंगी मैं 
न सुनाई देगी मेरी परवाज 

कहती हूँ समाज से भ्रूण हत्या होनी चाहिए 
हमारी आँख खुलने से पहले ही सोनी चाहिए 
जवान होती है जब एक लड़की 
लगता है मॉस का टुकड़ा अपना शरीर उसे 
खाने के लिए है हज़ारो तैयार जिसे

क्या लड़की होना अभिशाप है 
क्या लड़की को जन्म देना पाप है 
किसी की मर्जी के बिना 
उसकी शादी करवाना 
ये कैसा इन्साफ है 

इससे अच्छा है कि  हम 
माँ के पेट में ही मर जाए 
दुनियाँ में आकर भी तो 
लोग हमसे भेद -भाव ही करते है 
फिर हम दुनियां में किसलिए आए 


Thursday, 12 January 2017

ठण्डी

आई है ठण्डी -आई है ठण्डी
छाई है ठण्डी -छाई है ठण्डी
पी ले गर्म चाय की पायली
दूर भगा दे ये ठण्डी

हाथ क्या मले है तु
फुक - फुक के
खत्म हो गई है
होंटो की लाली सुख के

किसी को नहीं छोड़ती है ये 
बना देती सबको सुखी डंडी
चाहे कोई घर में बैठे रहे
या खड़ा हो जाए सब्जी मंडी

न छोड़े ये बच्चो को
न बच पाए इससे बड़े भी
चाहे हो कोई सजन
या हो कोई पाखंडी  

जहाँ तक जा सकती है नज़र 
वहाँ तक दिखती है सफेद झंडी 
करो जल्दी कोई उपाय
इससे बचने का वरना 
ये तो होती है बड़ी टोन्डी  



Thursday, 5 January 2017

दंगों का दर्द

बेवजह गम क्यों   
देता है कोई 
आँख हुई नम
तो क्या करेगा कोई 

उजाड़ के चला गया 
वह बसन्त बस्ती को 
बच्चे माँ के बिना 
माँ बच्चों के बिना हो गई 

देखनी थी जिन नन्ही 
आँखों को ये दुनियाँ 
वक्त से पहले 
क्यों वह सो गई 

चलना था जिसको 
अभी आगे बहुत 
अब अपंग हो गई 
भीड़ में रहते भी 
क्यों वह तन्हा हो गई 

क्या हर तरफ दहशत 
का मंजर चाहिए इनको 
कैसी ये मानवता हो गई 
लड़ने वालों का पता नहीं 
ये कैसी शरेआम जंग हो गई 

क्यों आदमी को 
आदमी खटकता है 
क्यों नाराज़ हो गया है कोई 
कब तक होते रहेंगे ये दंगें 
क्या इंसाफ करेगा कोई 

बड़े -बड़े नेताओं की 
बड़ी -बड़ी बातें हो गई 
कहते हैं कार्यवाही सख्त होगी 
पर बरबाद तो 
हो गया है कोई