कहती थी मैं
अपने माँ -बाबा से
मैं पढ़ना चाहती हूँ
मैं भी आगे बढ़ना चाहती हूँ
पर उन्हें कहाँ मेरी परवाह थी
उन्हें अपनी इज़्जत की पड़ी थी
मेरी शादी करवाना चाहते थे वो
इसलिए मैं कई दिनों से
बंद कमरे में पड़ी थी
सोचते थे मैं किसी
और के साथ भाग जाऊँगी
पर कौन विशवास करेगा मेरा
किसे मैं अपना दर्द बताऊँगी
जा रही हूँ मैं जिन्दगी से
मौत की तरफ आज
अब न दिखूंगी मैं
न सुनाई देगी मेरी परवाज
कहती हूँ समाज से भ्रूण हत्या होनी चाहिए
हमारी आँख खुलने से पहले ही सोनी चाहिए
जवान होती है जब एक लड़की
लगता है मॉस का टुकड़ा अपना शरीर उसे
खाने के लिए है हज़ारो तैयार जिसे
क्या लड़की होना अभिशाप है
क्या लड़की को जन्म देना पाप है
किसी की मर्जी के बिना
उसकी शादी करवाना
ये कैसा इन्साफ है
इससे अच्छा है कि हम
माँ के पेट में ही मर जाए
दुनियाँ में आकर भी तो
लोग हमसे भेद -भाव ही करते है
फिर हम दुनियां में किसलिए आए
अपने माँ -बाबा से
मैं पढ़ना चाहती हूँ
मैं भी आगे बढ़ना चाहती हूँ
पर उन्हें कहाँ मेरी परवाह थी
उन्हें अपनी इज़्जत की पड़ी थी
मेरी शादी करवाना चाहते थे वो
इसलिए मैं कई दिनों से
बंद कमरे में पड़ी थी
सोचते थे मैं किसी
और के साथ भाग जाऊँगी
पर कौन विशवास करेगा मेरा
किसे मैं अपना दर्द बताऊँगी
जा रही हूँ मैं जिन्दगी से
मौत की तरफ आज
अब न दिखूंगी मैं
न सुनाई देगी मेरी परवाज
कहती हूँ समाज से भ्रूण हत्या होनी चाहिए
हमारी आँख खुलने से पहले ही सोनी चाहिए
जवान होती है जब एक लड़की
लगता है मॉस का टुकड़ा अपना शरीर उसे
खाने के लिए है हज़ारो तैयार जिसे
क्या लड़की होना अभिशाप है
क्या लड़की को जन्म देना पाप है
किसी की मर्जी के बिना
उसकी शादी करवाना
ये कैसा इन्साफ है
इससे अच्छा है कि हम
माँ के पेट में ही मर जाए
दुनियाँ में आकर भी तो
लोग हमसे भेद -भाव ही करते है
फिर हम दुनियां में किसलिए आए