सोच अच्छी है
कर्म अच्छा है
जब कुछ नया देख लेता है
वह उलझ जाता है
जानें क्यों उसको
खुद के लोगों से ज्यादा
गैरों पे भरोसा है
बिना सोच-विचार करके
हर बात सच मान लेता है
विदेशों से आई हर वस्तु को
सबसे पहले वह अपनाता है
उसी का उपयोग करके
उसी के गुण गाता है
अपना देसी खाना छोड़ कर
विदेशी खाना वह खाता है
यहाँ उसे अच्छा नहीं लगता
इसलिए विदेश जाना चाहता है
अपनी संस्कृति को बन्धन
औरों को अच्छी बताता है
अपने देश की हर कमी को
वह विदेशों से तोलता है
हमारे समाज से ज्यादा
विदेशी समाज उसे बहाता है
अपनी भाषा से ज्यादा
विदेशी भाषा वह बोलता है
पर वह नहीं जानता
दुनियाँ का हर नागरिक
इस देश को जानना चाहता है
कर्म अच्छा है
जब कुछ नया देख लेता है
वह उलझ जाता है
जानें क्यों उसको
खुद के लोगों से ज्यादा
गैरों पे भरोसा है
बिना सोच-विचार करके
हर बात सच मान लेता है
विदेशों से आई हर वस्तु को
सबसे पहले वह अपनाता है
उसी का उपयोग करके
उसी के गुण गाता है
अपना देसी खाना छोड़ कर
विदेशी खाना वह खाता है
यहाँ उसे अच्छा नहीं लगता
इसलिए विदेश जाना चाहता है
अपनी संस्कृति को बन्धन
औरों को अच्छी बताता है
अपने देश की हर कमी को
वह विदेशों से तोलता है
हमारे समाज से ज्यादा
विदेशी समाज उसे बहाता है
अपनी भाषा से ज्यादा
विदेशी भाषा वह बोलता है
पर वह नहीं जानता
दुनियाँ का हर नागरिक
इस देश को जानना चाहता है