दिन गुजर जाते हैं
गुजर गए हैं कई साल
किसको सुनाऊ अपना दर्द
किससे पूछूँ तेरा हाल -चाल
कब आएगा घर तू फ़ौजी
मुझे रहता है
तेरा इंतज़ार हर साल
तू है जिंदगी मेरी
तू है तो लगती हूँ पूरी
वरना जैसे हूँ कोई कंकाल
जब होता है तू सामने
लगती हूँ मैं भी सजने -सवरने
वरना तेरे बिना फीका
लगता है हर श्रृंगार
सोचती रहती हूँ दिन -रात
कब तक करना पड़ेगा
मुझे यूँ तेरा इंतज़ार
आँखें तो बंद हो जाती है
तेरी राह तकते -तकते
पर बंद न हो पाते है
ये दिल के दवार
मिलता है जब भी तेरा पत्र
खुद को लेती हूँ संभाल
ख़बर मिलती है कि तू आने वाला है
अब खत्म हो जाएगा मेरा इंतज़ार
एक लहर सी दौड़ती है मेरे बदन में
जैसे आ गई हो कोई बहार
गुजर गए हैं कई साल
किसको सुनाऊ अपना दर्द
किससे पूछूँ तेरा हाल -चाल
कब आएगा घर तू फ़ौजी
मुझे रहता है
तेरा इंतज़ार हर साल
तू है जिंदगी मेरी
तू है तो लगती हूँ पूरी
वरना जैसे हूँ कोई कंकाल
जब होता है तू सामने
लगती हूँ मैं भी सजने -सवरने
वरना तेरे बिना फीका
लगता है हर श्रृंगार
सोचती रहती हूँ दिन -रात
कब तक करना पड़ेगा
मुझे यूँ तेरा इंतज़ार
आँखें तो बंद हो जाती है
तेरी राह तकते -तकते
पर बंद न हो पाते है
ये दिल के दवार
मिलता है जब भी तेरा पत्र
खुद को लेती हूँ संभाल
ख़बर मिलती है कि तू आने वाला है
अब खत्म हो जाएगा मेरा इंतज़ार
एक लहर सी दौड़ती है मेरे बदन में
जैसे आ गई हो कोई बहार
No comments:
Post a Comment