Tuesday, 15 January 2019

चिड़िया रानी

बड़ी दर्द भरी है तेरी दास्ता
ओ चिड़िया रानी
मैं भी तो लिखु कुछ तेरे लिए
लोगों ने लिख दी कई कहानी

कैसे समझेगी ये ज़ालिम दुनियाँ
उसके कर्मो से होती है मुझे परेशानी
कौन रोकेगा कैसे रोकेगा उन्हें
वह तो करते है मन-मानी

दुनियाँ तो सम्भली नहीं
ब्रह्माण्ड की बात करके बनते है विज्ञानी
पढ़े-लिखें तो सब बनते है
दूसरों के लिए सोचने वाला कोई नहीं

हवा तो दुषित कर ही दी है
न छोड़ रहे है अब पानी
खाने पिने की तो मुश्किल है ही
रहने का भी कोई, कहीं ठिकाना नहीं

हर मुश्किल में जी लेती
हर गम भी सह लेती
पर वक़्त जब आता है घर बसाने का
तब कहीं एक तिनका भी मिलता नहीं

तेरे घर की वजह से आज
मेरा घर कहीं बस्ता नहीं
खतरे में है मेरा वजुद आज
क्यों किसी को मेरी चिन्ता ही नहीं

माना प्रकृति मेरी नहीं
पर इसमें तेरा भी तो अधिकार नहीं
फिर क्यों तू मनमानी करता है
एक दिन तेरा भी तो वजूद बचेगा नहीं


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