Friday, 20 March 2020

कैद ज़िन्दगी

पिंजरे के पंछी सी
कैद हो गई है ज़िन्दगी
जियेगा क्या तू आज में
तुझे तो चिंता है कल की 

कैसे जियेगा इन्सान यहाँ
क्या हालत हो गई दुनियां की 
जी तो नहीं पाया तू दो पल को  
बातें करता है भविष्य की

निकलता  है तू हर सुबह
घर से ऑफिस से घर
देख तेरी हालत कैसी हो गई
छोड़ दे ये झूठा मुस्कुराना
इतना तो पता है हमें भी
कीमत है यहाँ हर खुशी की

प्रतीत होता है ऐसा तेरे कर्मो से

इच्छा है तुझे कुछ साथ ले जाने की
इतना जान ले ओ शख्स 
साथ  न  कोई  कुछ 
ले जा सका आज तक 
फिर तूने कैसे हिम्मत की

हर तरफ दिखता है मंज़र
नये दौर का 
फिर भी तनाव भरी है ज़िन्दगी 
न जाने कब हो
इस दुनियां से जाना
खुशी  से जी ले मिलते है जितने पल भी 


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