Sunday, 14 November 2021

हमारी बात

उनसे जो बात हो गई
समझो मुलाक़ात हो गई
दो पल की बारीश
समझो बरसात हो गई

बार-बार क्या मिलना-जुलना
ये कैसी अब धारणा हो गई
अपनी बस एक मुलाक़ात ही
सदियों की सौगात हो गई

आज के प्रेमियों की
अजब है हर मुलाक़ात
एक पल में शाम
दूसरे पल में ही रात हो गई

अजब सा दिल
होता उन दिनों में
निकल जाते दिन-महीने
एक झलक पाने में

दिख जाती जो सूरत
वो दिल में तस्वीर हो गई
जो एक पल नज़रे मिली
फिर प्यार की शुरुआत हो गई


Thursday, 14 October 2021

बेसहारा पशु

क्यों है वो बेसहारा

क्यों नहीं उनका घर-दवारा

कौन करेगा उनका समाधान

देखते है सभी नज़ारा


अपने जीवन को स्वस्थ बनाने हेतु

तुम लेते हो पशुओं का सहारा

हो जाता जब पशु बुढ़ा

कर देते हो तुम उससे किनारा


घूमना पड़ता है उसे गली-गली

फिरता है वो मारा-मारा

एक बार जो उसे निकाल दिया

फिर नहीं देखते उसे दोबारा


कैसा जीवन दे रहे हो तुम

इन बेजुबान पशुओं को यारा

मत सोचो कोई नहीं कहने वाला

खुदा ही है उनका सहारा


लगे है जो सेवा में

बन रहे है पशुओं का सहारा

खोली है जिन्होने पशुशाला

हाथ जोड़ कर सलाम उन्हें हमारा


Thursday, 9 September 2021

हार जीत

न कोई हारा तुझसे

न किसी को तू हारा पाएगा

न कोई जीता तुझसे

न किसी से तू जीत पाएगा


हार-जीत है तो

ज़िन्दगी के दो पहलु ही

छलकते है ये सामने

कोई इन्हें न छिपा पाएगा


जीवन है दो पल

कैसे ये निर्णय कर पाएगा

तू हारा या तू जीता

कैसे खुद को बता पाएगा


मुक़म्मल नहीं होता

हर कार्य इस जीवन में

कुछ न कुछ तो

अधूरा ही रह जाएगा


सोच तू बस अच्छा

जो करे अच्छा हो जाएगा

सन्तुष्टि हो गई अगर तुझे

फिर ज़िन्दगी में कभी हार न पाएगा


Saturday, 7 August 2021

गुलामी की वेदना

तुम क्या जानो

हमने क्या-क्या सहा है

ज़माने ने हमें

क्या-क्या नहीं कहा है


तुम क्या जानो

दुसरो के अधीन रहना

अच्छे को बुरा और

बुरे को अच्छा पड़ता है कहना


गैरों की खुशियाँ के लिए

पड़ता है अपना ख़ून बहाना

वरना ठिकाना तो दूर की बात

मुश्किल से मिलता है दो वक़्त का खाना


होता है पूरा अधिकार उनका हम पर

ग़लत नहीं होगा पशु कहना

हर आदेश सुनना पड़ता है

मुश्किल हो जाता साँस लेना


नहीं ये केवल शारीरिक वेदना

हर प्रकार का दर्द पड़ता है झेलना

उन्हें नहीं कोई कदर किसी की

आसान है उनको हमारे दिल दिमाग़ से खेलना


Friday, 9 July 2021

आँसू

ये कभी रुकते नहीं

ये कभी सुखते नहीं

आने से पहले ये

किसी को पुछते नहीं


मालूम है सबको

जिंदगी की सच्चाई

फिर भी हम समझते नहीं

आँसू गम में छलकते है

पर खुशी में भी तो

ये कभी रुकते नहीं


ये किसी को कभी

कमज़ोर करते नहीं

आते-जाते रहते है पर

किसी को परेशान करते नहीं


जिना है सबने

मरना है सबने

साथ ले जाना किसी ने नहीं

कितना समेटोगे

कब तक समेटोगे

सकल इस दुनिया मे कुछ भी नहीं

आसूँ है ये कभी रुकते नहीं


Saturday, 5 June 2021

बदलता व्यव्हार

 झूठे है बोल उसके

झूठा है उसका व्यव्हार

पीट के पीछे घुसा

सामने करता है जी सरकार


बातचीत करना तो दूर

वह नहीं करता है

हाथ जोड़ कर नमस्कार

क्यों बदल रहा है वह

क्यों बदल गया है उसका व्यव्हार


न उसके दिल में

बड़ो के लिए आदर है

न है उसे बच्चों से प्यार

मज़बूरी लगती है उसको

किसी की बात सुनना

नहीं है वह इसके लिए तैयार


निरादर की सीढ़ी

वह चढ़ रहा है लगातार

मज़बूर है क्या वह

या बदलना नहीं चाहता अपना व्यव्हार

न जाने उसको पैसों का है या

आधुनिकता का चढ़ा है ख़ुमार

लगता है जैसे

वह हर पल हो बीमार


Sunday, 23 May 2021

खाली सड़क

 सहर का समय है

सड़क पड़ी खाली सुनसान है

इतनी शान्त है वह

जैसे दिन भर की चहल-पहल

से वह अभी अनजान है


कुछ कमी सी लग रही है

कुछ नमी सी लग रही है

न कोई युवा, न बच्चा

न कोई गाड़ी, न रिक्शा

सड़क तन्हा लग रही है


बिना वाहनों के सड़क

एकदम खाली है

तन्हा जैसे कोई छोरी है

मंज़र खाली सड़कों का

जैसे लुटी हुई तिजोरी है


गाड़ियों से सजी-सवरी

सड़कें हँसकर बोलती है

गाड़ियाँ उसकी दिल-धड़कन है

गाड़ी के बिना उसकी स्थिति

जैसे आभूषण के बिना दुल्हन है


Wednesday, 28 April 2021

उसके कश

हवा में धुँआ वह उड़ाता था
अपने मस्लस देख कर
कश वह लगाता था

कश अन्दर
वह अपने मसल्स देखता था
कश बाहर
वह आसमान को देखता था

नौसिखिया था शायद वह
अभी-अभी पीना सीखा था
थोड़ा काश अन्दर
फिर हवा में उड़ा देता था

फटा-फट कश  खिंचता था
आँखों को वह मिचता था
ऐश गिराना भी नहीं
आता था उसे
फिर भी धुँआ उड़ाता था

कभी जलाता
कभी बुझाता था
कभी फॉर सक्वेयर
कभी गोल्ड फ्लेक पीता था


Friday, 5 February 2021

मेरा बिस्तर

मेरा बिस्तर मुझे बुलाता है
बैठे-बैठे वो नींद लाता है
सुलाने के लिए वो आगे
उठाने को भूल जाता है

मुझे लगता है शायद
तन्हाई से वो डरता है
किसी को वो छोड़ता नहीं
क्यूँकि अकेला रह जाता है

कुछ समय को अगर
मैं लेटु दिन में
कर देता है कैद दिमाग वो
चाँद तारें दिखता है दिन में

सब दर्द वो भुलाता है
थकान को भी मिटाता है
चेहरे पे मुस्कान
हर गम को छुपाता है

जब कहीं और जगह
मुझे नींद नहीं आती है
जाग-जाग के सोना पड़ता है
तब बिस्तर की याद आती है 


Tuesday, 5 January 2021

तलाश में

घुम रहा है युवा

एक जगह से दूसरी जगह

नौकरी की तलाश में

मिलेगा उसे भी मौका कहीं

घूम रहा है इसी आस में


राह चुन रहा है युवा

असंजस में है मगर

चला है धीरे-धीरे राह में

ठान तो लिया है उसने

पा लेगा वह लक्ष्य

जो बुन लिया उसने दिमाग़ में


जम के चल रहा है युवा

हर क़दम फुक-फुक के

कहीं डूब न जाए दलदल में

चलना है उसे अभी बहुत

जा के काफी आगे

 चमकना है इस जहान में


गगन चुम रहा है युवा

पर तुझे क्या है हुआ

उठो,जागो,आगे बड़ो

उतर जाओ सब मैदान में

बन के दिखाओ कुछ ऐसा

कि हम भी लिखें आपकी शान में