बिना किसी को कहे यहाँ
खाना तो मिलता है समय से
न कोई लड़ाई-झगड़ा है यहाँ
बात करते हैं सभी प्यार से
खाना तो मिलता है समय से
न कोई लड़ाई-झगड़ा है यहाँ
बात करते हैं सभी प्यार से
वो कई वजह के झगड़े
नाता नहीं अब उन परेशानियों से
न कोई सुनाता है यहाँ
छुटकारा मिल गया है उन तानों से
है प्यार का माहौल यहाँ
नहीं करता काम कोई स्वार्थ से
कहते है वंचित न करो
ख़ुशी मिलती है हमें सेवा से
क्षण भर ज़िन्दगी है हमारी
अब क्या नाता किसी से
अपनों ने तो बेगाना कर दिया
अब तो उम्मीद है गैरों से
दी है छत जिसने हमें
नाता है उसका ज़माने से
खुले है उसके घर-दिल के दरवाजे
आ जाए कोई भी कहीं से
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