Monday, 27 February 2023

वह दो

दो अज़नबी बैठे थे
एक की नज़र दाए
एक की नज़र बाए
कभी सीधी भी होती थी
पर कभी एक दूसरे को
नहीं देखती थी
एक अपनापन था
पर तन्हाई भी थी

बस कुछ इंचों
का था उनमें फासला
रोज़ का होता था
उनका साथ बैठना
फिर भी महीनो से
नहीं हुई थी उनमें बातें
जबकि एक ही बस में
रोज़ थे वह आते-जाते

एक अगर कुछ
पढ़ने लग जाता
तो दूसरा कान में हेड फोन
लगा कर गाने सुनता
अलग सा रिश्ता
बन गया था दोनों में
पर दोनों साथ बैठ कर भी
आपस में कोई बात न करता


Saturday, 18 February 2023

ये कैसे दिन

कैसे दिन आ गए हैं
दुध बेचने वाले आज
पीने वालों को ढूँढ रहे हैं

पर पीने वाले
कहीं और ही व्यस्त हैं
वो शराब के ठेके दूँढ रहे हैं

नहीं फिर भी कोई राज़ी
दुध वाले घर-घर जा कर
दुध दे रहे हैं

पर पीने वाले शख्स 
हर दूसरे तीसरे दिन
ठेके में जा कर
शराब ले रहे हैं

कहते हैं दुध वाले को
वो दुध का पैसा
ज्यादा ले रहे हैं
पर शराब को नहीं बोलते
जिसे mrp से भी ज्यादा 
मुल्य दे कर ले रहे हैं 


Sunday, 12 February 2023

चुनाव प्रचार

गूँज रही है आवाज़ें
उठ रही है लहर
जीतेगा भाई जीतेगा
अपना नेता जीतेगा
ऐसे हो रहा है प्रचार

लगें है पोस्टर गली-गली
घर-घर हर दीवार
सजने लगी है सड़कें
रंग-बिरंगी झंडिओ से
जैसे सावन आ गया हो
समय से पहले इस बार

काम किया है और
करते रहेगें हर बार
हमारे लिए तो सेवा है राजनीति
उनके लिए है व्यापार

एक नहीं है
खड़े हैं कई उम्मीदवार
कौन जीतेगा-कौन जीतेगा
फ़ैल रहा है ये समाचार
कौन बनेगा इस बार मंत्री
किसकी आएगी सरकार


Monday, 6 February 2023

बदला क्‍या

एक समय था जब
एक कमाने वाला
दस खाने वाले थे
फिर भी कोई कमी नहीं
सब ख़ुशी से रहते थे

आसानी से होता था
घर में सबका गुजारा
कोई चिन्ता में न रहते थे
पड़ जाती कोई जरूरत
होती अगर कोई कमी-पेशी
तो सब उसे ही कहते थे

समय के हिसाब से समय गुजारा
वो भी तो कोई लोग थे
कितने लोगों का भार होता
उस एक कंदे पर
फिर भी हँसी से उठाते थे

वक्‍त तब कैसा था
जब कमा कर देना भी
अपनी ख़ुशी समझते थे
क्या अहमियत है उनकी
इस बात को वो समझते थे


Friday, 3 February 2023

तेरे सहारे

तू न रहा अगर कभी
तो हम किसे पुकारे
आए हैं तेरे भरोसे
इस शहर में हम तेरे सहारे

तू है तो है ज़िन्दगी
तेरे संग हर नज़ारे
तू है तो है पतझड़ भी बसंत
तेरे संग हर बहारे

तू है तो है ठहराव ज़िन्दगी में
वरना हम तो हैं बनजारे
तेरे बिना हम बीच मझदार में
न मिलते है कभी किनारे

तुझ से है हम सवरे
तुने ही है सवारे
तेरे बिना एक पल भी
नहीं है ज़िन्दगी के विचारे

तुझसे है मेरी साँसे
तुझसे जुड़े धागे सारे 
तेरे संग है चाँदनी राते
तेरे संग है उजले सितारें