Monday, 6 February 2023

बदला क्‍या

एक समय था जब
एक कमाने वाला
दस खाने वाले थे
फिर भी कोई कमी नहीं
सब ख़ुशी से रहते थे

आसानी से होता था
घर में सबका गुजारा
कोई चिन्ता में न रहते थे
पड़ जाती कोई जरूरत
होती अगर कोई कमी-पेशी
तो सब उसे ही कहते थे

समय के हिसाब से समय गुजारा
वो भी तो कोई लोग थे
कितने लोगों का भार होता
उस एक कंदे पर
फिर भी हँसी से उठाते थे

वक्‍त तब कैसा था
जब कमा कर देना भी
अपनी ख़ुशी समझते थे
क्या अहमियत है उनकी
इस बात को वो समझते थे


No comments:

Post a Comment