जब टटोला धोने को
मैंने अपना कोट
ढूंढ़ते-ढूंढते मुझे
उसमें मिला पुराना नोट
कुछ देर देख कर सोचा
कुछ नहीं बदला
वही गाँधी है
वही पाँच सौ का नम्बर
कहने को बदल गया है नोट
मिल जाता है जब भी
कहीं भी किसी को
कभी भी पुराना नोट
हो जाता है सर में दर्द
दिल में लग जाती है चोट
सोच में पड़ गया मैं
क्या करूँ अब इसका
खत्म हो गई है वैधता
न चढ़ा सकता हूँ कहीं भेंट
कागज़ का टुकड़ा बन कर
रह गया है अब ये नोट
न कोई सम्मान मिलता
न मिलते है अब वोट