तत्काल की लाइन में
लगना नहीं इतना आसान
या वक़्त गवाना पड़ता है
या करने पड़ते है पैसे कुर्बान
यहाँ नहीं चलता है
किसी का भी सिक्का
न चलती है
किसी की जान पहचान
न कोई छोटा
न कोई बड़ा
सब लगते लाइन में एक समान
जो करता है दादा बनने की कोशिश
उसे दो मिनट में सीधा
कर देते हैं यहाँ इन्सान
लगे रहना पड़ता है
बस लाइन में
न चुप रहना पड़ता है
न चलानी पड़ती है ज्यादा जुबान
कोई अगर गलत तरीके से
घुसने की कोशिश करता है
बस बरसने लगते है उस पर
जैसे हो वो कोई शैतान
पंद्रह-सोलाह घण्टे होती है
जनता लाइन में परेशान
फिर भी नहीं कन्फर्म टिकट
कब निकालेगा रेलवे इसका समाधान
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