नाम है तेरा झूठा
औलाद है तू गैरों की
उनपे अत्याचार हुआ
तू झट से बोल पड़ी
हमारा तो घर ही उजड़ गया
फिर भी तू चुप रह गई
कुछ तो बात है राज़ की
क्यों तुझे उनसे मोहब्बत
हमारे लिए तूने आवाज़ ही बदल दी
भूल मत जाना तू उसकी मर्ज़ी से
चलती है दुनिया में साँसे सबकी
पड़ेगी जिस दिन तेरे सर उसकी लाठी
उस दिन हिल जाएगी तेरी हस्ती ही
मानवता को देख तू
किसी एक मज़हब को नहीं
प्यार की भावना चाहिए इस देश में
कोई नफ़रत की दीवार नहीं
है अगर तु बांटने की कोशिश में लगी
तो इतना जान ले
ये किसी की भी इच्छा है या हो चाहत
ये कभी पूरी नहीं होगी
जिन्होंने सहा है उन्होंने कहा है
हमें मुआवजा नहीं न्याय चाहिए
जिन्होंने दुष्कर्म किए है
वह जेल की सलाखों के पीछे होने चाहिए
पर वह इंसाफ दिलाने के बजाए कहती है
वहाँ से छोड़ कर कहीँ और जाना चाहिए