कहाँ होगा अब बसेरा
कहाँ होगा अब सवेरा
कहने को है जग तेरा
कहने को है जग मेरा
फिर क्यों नहीं है
बसेरा यहाँ तेरा -मेरा
छोड़ के तो आ गए है
अब हम वह मोहल्ला
जीना तो पड़ेगा भाई
सबको अकेला-अकेला
मान लो यही है भाग्य हमारा
कुछ भी हो जाए
वापिस तो नहीं जाना है दोबारा
कैसे भी गुजार लेंगे ठंडी रातें
मुश्किल है शायद अब
कंबल-रज़ाई से मुलाकातें
थे तो वह अपने ही
फिर भी जाने क्यों
करते थे बेगानों सी बातें
काटनी है जाड़े की हर रात
अब हमें सड़कों पर
खुदा है मालिक सबका
वही है सबका सहारा
कितना जियेंगे क्या मालूम
अब आगे का भविष्य
तय होगा उसके द्वारा