Friday, 10 February 2017

रैन बसेरा

कहाँ होगा अब बसेरा 
कहाँ होगा अब सवेरा 
कहने को है जग तेरा 
कहने को है जग मेरा 
फिर क्यों  नहीं  है 
बसेरा यहाँ तेरा -मेरा 

छोड़ के  तो गए  है 
अब हम वह मोहल्ला  
जीना तो पड़ेगा भाई 
सबको अकेला-अकेला
मान लो यही है भाग्य हमारा 
कुछ भी हो जाए 
वापिस तो नहीं जाना है दोबारा  

कैसे भी गुजार लेंगे ठंडी रातें
मुश्किल है शायद अब  
कंबल-रज़ाई से मुलाकातें 
थे तो वह अपने ही 
फिर भी जाने क्यों 
करते थे बेगानों सी बातें 

काटनी है जाड़े  की हर रात 
अब हमें सड़कों पर    
खुदा है मालिक सबका 
वही है सबका सहारा 
कितना जियेंगे क्या मालूम 
अब आगे का भविष्य 
तय होगा उसके द्वारा