Friday, 24 February 2017

तू चुप क्यों

नाम है तेरा झूठा 
औलाद है तू गैरों की 
उनपे अत्याचार हुआ 
तू झट से बोल पड़ी 
हमारा तो घर ही उजड़ गया 
फिर भी तू चुप रह गई 

कुछ तो बात है राज़ की 
क्यों तुझे उनसे मोहब्बत 
हमारे लिए तूने आवाज़ ही बदल दी 
भूल मत जाना तू उसकी मर्ज़ी से 
चलती है दुनिया में साँसे सबकी 
पड़ेगी जिस दिन तेरे सर उसकी लाठी 
उस दिन हिल जाएगी तेरी हस्ती ही 

मानवता को देख तू   
किसी एक मज़हब को नहीं 
प्यार की भावना चाहिए इस देश में 
कोई नफ़रत की दीवार नहीं 
है अगर तु बांटने की कोशिश में लगी 
तो इतना जान ले 
ये किसी की भी इच्छा है या हो चाहत 
ये कभी पूरी नहीं होगी  

जिन्होंने सहा है उन्होंने कहा है 
हमें मुआवजा नहीं न्याय चाहिए 
जिन्होंने दुष्कर्म किए है 
वह जेल की सलाखों के पीछे होने चाहिए 
पर वह इंसाफ दिलाने के बजाए कहती है 
वहाँ से छोड़ कर कहीँ और जाना चाहिए