Friday, 24 February 2017

नर्स

वह आती थी  
वह जाती थी 
डॉक्टर साहब आएगे 
चैक कर के बताएगे 
वह कहती थी 

मैं तो अनपढ़ था 
मेरी समझ में ही 
बात नहीं आती थी 
कोई प्यार से 
कोई गुसे से बताती थी 

रंग - बिरंगी दवाईयां 
वह मुझे दे जाती थी
कब कौन सी खिलानी  है 
वह मुझे बताती थी 
मैं उलझ जाता था उनमे 
वह आके सुलजाती थी  

मेरा बच्चा ठीक है 
कह कर, कभी हँसाती थी
कभी इसका ऑपरेशन होगा 
क्या तुम्हारे पास पैसे है 
कह कर रुलाती थी 


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