Thursday, 8 December 2022

जान की कीमत

आज न जान की कीमत
न ईमान की रही
आज न सम्मान की कीमत
न इन्सान की रही

पशुओं से भी बत्तर
हो रहा है इन्सान का हाल
गुलामी करनी पड़ती है दिन रात
तब जा के मिलता है माल

हर इन्सान की अब
इन्सानियत है खत्म हो रही
हर एक बन गया स्वार्थी
ज़िंदगी है रो रही

आ रहा है इन्सान
जब तक किसी के काम
होगी तब तक उसकी इज्ज़त
फिर न रहेगा पता, न नाम

क्या होगी कीमत जान की
जनसँख्या है जो बढ़ रही
कोई जिए या मरे परवाह नहीं
ऐसी ज़िन्दगी हो रही है इंसान की


Thursday, 10 November 2022

ज्ञान की धारा

ज्ञान है वह धुंध
जिस में तू समा जाएगा
सोचेगा पकड़ लेगा
तू कभी न कभी उसको
जब भी तू बढ़ेगा आगे
तो फासला बढ़ता ही जाएगा

ज्ञान के बीच रह कर भी
ज्ञान को समझ न पाएगा
क्या तू अधूरा है
क्या हो गया है पूर्ण
उलझा रहेगा इसी जुस्तजू में
कब पूर्ण ज्ञानी बन जाएगा

चलता रहेगा यूँ ही सिलसिला
चाहे तू दुनियाँ से चला जाएगा
न कोई पूर्ण ज्ञान धारण कर सका
न कोई कभी कर पाएगा
बढ़ता ही जा रहा है अनंत काल से
और भविष्य में भी बढ़ता ही जाएगा


Wednesday, 5 October 2022

जीवन स्तर

दिन रात लगा है मानव
अपनी जरूरतों को
पूरा करने के लिए
घूम रहा है वह
शहर-शहर सड़को पर

न वह रुक रहा है
न वह थक रहा है
जूनून है उसमें
पैसे इकट्ठा करने का
दिखता है उसके कामों पर

अपनी आवश्यकता की वस्तुएँ
बहुत पड़ी है उसके घर
फिर भी लगा है वह
देर रात तक जगा है वह
लगता है जैसे उसने जाना है चाँद पर

हो रहे है सफल प्रयास
मिट रही है सबकी प्यास
हर वर्ग का बदल रहा है जीवन स्तर
रंग ला रही है उनकी मेहनत
दिखा रहे हैं वह बदल कर

पचास वाला सौ में
सौ वाला पांच सौ में
कर रहा है साबित बदल कर
हौंसले बुलन्द है उनके
मेहनत के लगाए है जबसे पर


Sunday, 11 September 2022

नौकर की शिकायत

मेरी ईमानदारी का 
क्या कोई मोल नहीं
उसके बोल में वाह-वाह
क्या मेरे बोल,बोल नहीं

उसने तो बस
ढाई घण्टे का किरदार किया है
मैंने तो ये काम
अपनी ज़िन्दगी भर किया है

मुझे तो नहीं मिली
इतनी शौहरत कभी
पर आप लोगों ने उसको
दो पल में ही दे दी

पैसे कमा रहा है वह
फिर भी है आपको उससे हमदर्दी
हर दिन काम करता हूँ
पर कोई नहीं कहता आराम कर तू भी

क्या बात समझोगे तुम उसकी
मैं बताता हूँ बात सच्चाई की
रात को सोना पड़ता है सबके बाद
सुबह जागना उनसे पहले ही


Monday, 15 August 2022

आवाज़ दो

आपकी जानिब से
आवाज़ तो उठे
भूकम्प ला देंगे
इस शान्त माहौल में
आपके हाथ, साथ
देने के लिए तो उठे


सच है जो वही बोलेंगे
झूठ के राज़ सबके
सबके सामने खोलेंगे
फिर चाहे टमाटर पड़े या अण्डे
हम न हटेंगे पीछे
चाहे पड़ जाए पुलिस के डण्डे


सिखा है जीना सर उठा के
फिर क्यों किसी के डर से झुकें
कहतें है हर बात
पूरी सच्चाई के साथ
एक बार जो बोल दिया हमने
फिर कभी पीछे नहीं हटें


तुम एक आवाज़ दो
हम जगा देंगे उनको भी
जो पड़े है कब से सो के
निर्णय होगा निष्पक्षता से
इंसाफ मिलेगा सबको
जो खड़े रह कर हैं थके


Sunday, 5 June 2022

अपना सोच

ये जूनून है तेरा
या है ये मज़बूरी
क्यों करता है तू
हर रोज़ तय इतनी दूरी

देख कर तुझको
लगता है ऐसा मुझको
ज़िन्दगी का कोई मूल्य नहीं
पैसा है तेरे लिए सबसे जरुरी

दो पल का भी वक़्त नहीं
खुद के पास तेरे लिए
कब होंगी तेरी आशाएं पुरी
कब सोचेगा अपने जीवन के लिए

कुछ तो सोच अपना
कुछ तो ले निर्णय तू भी
क्यों चलता है उनके पीछे
कब तक चलेगी ये हज़ूरी

जीवन जीना है तूने
नहीं कहना फिर ये-वो थी मज़बूरी
हर कदम बड़ा अपने दम पर
वरना रह जाएगी राहें अधूरी


Monday, 9 May 2022

स्वच्छता का नज़रिया

बदल रही है दुनियाँ
बदल रहा है समाज
अलग हो गई है अब
स्वच्छता की परिभाषा
बदल गया है अंदाज़

धोती-कुरता भूल गए
सूट-बूट पहनते है सभी
सहाब जैसे हैं सबके मिज़ाज़
अच्छे कपड़े ही है
स्वच्छता की निशानी आज

शरीर शुध्दि से नहीं
किसी को कोई मतलब
बस कपड़े दिखने चाहिए साफ
वरना दो मिनट में ही
बोल देते है गंदे कपड़े वालों के खिलाप

बड़े अजीब है लोग अब
कहते है अच्छा पहनावा ही
दिखाता है आदमी की औकात
कोई फर्क नहीं पड़ता आजकल
दाल-रोटी खाओ या सब्ज़ी-भात


Sunday, 10 April 2022

अपरिचित दर्द

सो जा.. सो जा..
सो जा बेटी मेरी
जीने न दूँगा उनको
न जीने दूँगा खुद को
जो रुख्सत होगी साँसे तेरी


रोना छोड़ दे अब
यही थी शायद किस्मत तेरी
जो होना था वो
हो चूका है अब
इसमें क्या ग़लती तेरी


मत सोच एक पल भी
क्या कहेगी दुनियाँ सारी
जिनी तुझे है ज़िन्दगी
समाज से क्या लेना देना
हम समझते है मनोदशा तेरी


बदल गए है अब तेरे रास्ते
बदल गई है तक़दीर तेरी
है तुझ में कितनी हिम्मत
तेरी हिम्मत ही अब
तय करेंगी राहें तेरी


Sunday, 6 March 2022

सितारों का हाल

अपनी जैकेट को चादर
बाँहों को तकिया बनाया मैंने
ऐसी कई रातों को
तन्हा गुजारा है मैंने

रास्ते थे मेरे हमसफ़र
कोई नहीं था साथ अपने
ठान लिया था बस चलना है
बाकी आगे जो हो रब जाने

नहीं देता कोई आसानी से काम
ढूंढते थे सभी ठुकराने के बहाने
चाहे उन्हें कुछ भी न आए
फिर भी बनते थे सियाने

लड़ना तो था ही ज़िन्दगी से
फिर चाहे बन जाते अफ़साने
पड़ जाते अगर हौंसले कमज़ोर
शायद बदल देते हम भी ठिकाने

देखे थे कई सपने
जो करने थे मुझको पुरे
एक मौके की तलाश थी
फिर तो भरनी थी उड़ाने


Wednesday, 9 February 2022

वृद्ध आश्रम

बिना किसी को कहे यहाँ
खाना तो मिलता है समय से
न कोई लड़ाई-झगड़ा है यहाँ
बात करते हैं सभी प्यार से

वो कई वजह के झगड़े
नाता नहीं अब उन परेशानियों से
न कोई सुनाता है यहाँ
छुटकारा मिल गया है उन तानों से

है प्यार का माहौल यहाँ
नहीं करता काम कोई स्वार्थ से
कहते है वंचित न करो
ख़ुशी मिलती है हमें सेवा से

क्षण भर ज़िन्दगी है हमारी
अब क्या नाता किसी से
अपनों ने तो बेगाना कर दिया
अब तो उम्मीद है गैरों से

दी है छत जिसने हमें
नाता है उसका ज़माने से
खुले है उसके घर-दिल के दरवाजे
आ जाए कोई भी कहीं से


Saturday, 8 January 2022

लड़कियों का ज़माना

अब क्या लज्जा
अब क्या शर्माना
लड़कियों का है दबदबा
लड़कियों का है ज़माना

भूल गई है वो झुकना
अब आता है उन्हें झुकाना
सिख लिया है उन्होंने
अब अपने बलबुतो पे जीना

छोड़ दिया है अब सहना
आता है ज़माने से लड़ना
हर वक़्त देख लिया है उन्होंने
आता है अब सबक सीखना

न अब वो डरती है
नहीं हटती है पीछे
चाहे हो जाए कुछ भी
चाहे बन जाए कोई अफसाना

लड़के भी बन रहे हैं 
अब बदल कर लड़कियाँ
देखो कितना बदल गया समाज
कैसा आ गया अब जमाना