जगह-जगह में
ये मज़हबी झण्डे क्यों
हमेशा लड़ने का कारण
मज़हब ही क्यों
विरोध जता कर
विरोध बता कर
भी हो सकता है
फिर ये मज़हबी झण्डे क्यों
घर के अंदर कुछ भी हो
बाहर झण्डे लगते है क्यों
घर आराम से रहने के लिए है
फिर भी वहाँ मज़हबी झण्डे क्यों
कैसी मानसिकता है ये
जलसों में भी मज़हबी झण्डे
तू मानव है, क्या ये काफी नहीं
झण्डे दिखाने जरुरी क्यों
कहते है खुदा के
बंदे है हम सभी
फिर दुनियाँ को मज़हबी झण्डे
दिखाते हो क्यों
मानव है सभी एक जैसे
पर साथ में ये झण्डे क्यों