Thursday, 12 January 2023

मन के सच्चे

बच्चे होते हैं
मन के सच्चे
न किसी से छुपाने का डर
न किसी से बताने का डर

साथी चाहिए उनको
कोई साथ खेलने के लिए
न उन्हें धर्म की परवाह
न उन्हें जाति का डर

निस्वार्थ भाव से
मिलते हैं वो सभी से
चल पड़ते हैं किसी के साथ भी
चॉकलेट या टॉफी के लालच से

कोई उन्हें हँसाए या रुलाए
नहीं नफरत उनके मन में
कौन अपना कौन पराया
नहीं रहते वो इस चिन्ता में

आज़ाद पंछी हैं वो
चले जाते हैं किसी के भी घर में
इधर-उधर चलना तोड़-फोड़ करना जारी
जैसे हो अपने ही घर में



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