चमक-दमक है सब कुछ
एक आधुनिकवादी के लिए
भागना है दिन-रात
क्या जी रहा है इसीलिए
उसे न खुद की चिंता है
न है प्रकृति की
उसे ही मिल जाए सब कुछ
चाहे बचे न बचे आनेवालों के लिए
रहना ही है जब
चार दिवारी के भीतर
फिर इतना बड़ा ताम-जाम
ये सब है किसके लिए
गुज़ारा जब दो
रोटी से चल सकता है
फिर ज्यादा से ज्यादा खाना
बनता है किसके लिए
आगे निकलने की वजह ढूँढता है
कभी तो सोच कारण रुकने के लिए
वैसे भी जितना तू भागेगा
हानिकारक होगा प्रकृति के लिए
तुम्हारा ये दिखावे का जुनून
अभिषाप बन जाएगा मानव के लिए
आने वालें कहेंगे हमारे पुर्वज
खुद तो आसमान में रहते थे
हमें धरती भी न छोड़ी जीने के लिए
अभिषाप बन जाएगा मानव के लिए
आने वालें कहेंगे हमारे पुर्वज
खुद तो आसमान में रहते थे
हमें धरती भी न छोड़ी जीने के लिए
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