उसको सब पता है
उसकी क्या खता है
चार दिन का कारावास
न मिलनी है मौत की सजा
तभी तो हो रही उसकी मनमर्जी
यही उसकी निडरता की है वजा
उसकी क्या खता है
चार दिन का कारावास
न मिलनी है मौत की सजा
तभी तो हो रही उसकी मनमर्जी
यही उसकी निडरता की है वजा
एक आदमी दस को
मार के चला जाता है
इंसाफ आँख बंद कर
देखता ही रह जाता है
आती है जब-जब भी
उसकी मौत की बारी
तब मानव अधिकार के
नियम का उलंगन हो जाता हैहै
मार के चला जाता है
इंसाफ आँख बंद कर
देखता ही रह जाता है
आती है जब-जब भी
उसकी मौत की बारी
तब मानव अधिकार के
नियम का उलंगन हो जाता हैहै
कब तक चलता रहेगा ऐसा
किसी की ज़िन्दगी ही चली जाए
उसके लिए वो एक तमाशा है
कानून के हर दाव-पेच
हर धारा उसको पता है
क्या कभी बदलनी ये परिभाषा है
किसी की ज़िन्दगी ही चली जाए
उसके लिए वो एक तमाशा है
कानून के हर दाव-पेच
हर धारा उसको पता है
क्या कभी बदलनी ये परिभाषा है
कैसे कम होंगी वारदातें
वो तो पैसों के लिए
कुछ भी करने को तैयार है
बढ़ती जा रही है उसकी चाहते
कैसे मिलेगी उसे सजा
कौन ढूंढेगा उसके लिए वजा
जो करते है सजा की बातें
वही लोग है उसको बचाते
वो तो पैसों के लिए
कुछ भी करने को तैयार है
बढ़ती जा रही है उसकी चाहते
कैसे मिलेगी उसे सजा
कौन ढूंढेगा उसके लिए वजा
जो करते है सजा की बातें
वही लोग है उसको बचाते
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